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Sunday, 8 January 2012

दो कदम .....

दो कदम और जो हम साथ जाते
तो पल-पल मिलने की इच्छा को यूं ना दबाते ..
सही-गलत की उलझन से हम परे रह जाते
दो कदम और जो हम साथ जाते..

रूठ जाते जो तुम..
बाहों में भर गले हम लगाते,
यूं दूर-दूर से न तुमको मनाते
दो कदम और जो हम साथ जाते..

सपनों और अरमानों की झिलमिल सी दुनिया
संग मिल कर उसे,
हक़ीक़त में  सजाते
दो कदम और जो हम साथ जाते......





1 comment:

  1. Bahut badhiya likha hai..
    come to my blog www.pradip13m.blogspot.com

    Plz remove word verification in comment..

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